19 “क्या तूने घोड़े को उसका बल दिया है? क्या तूने उसकी गर्दन में फहराती हुई घने बाल जमाई है?20 क्या उसको टिड्डी की सी उछलने की शक्ति तू देता है? उसके फूँक्कारने का शब्द डरावना होता है।21 वह तराई में टाप मारता है और अपने बल से हर्षित रहता है, वह हथियार-बन्दों का सामना करने को निकल पड़ता है।22 वह डर की बात पर हँसता
, और नहीं घबराता; और तलवार से पीछे नहीं हटता।23 तरकश और चमकता हुआ सांग और भाला उस पर खड़खड़ाता है।24 वह रिस और क्रोध के मारे भूमि को निगलता है; जब नरसिंगे का शब्द सुनाई देता है तब वह रुकता नहीं।25 जब जब नरसिंगा बजता तब-तब वह हिन-हिन करता है, और लड़ाई और अफसरों की ललकार और जय जयकार को दूर से सूँघ लेता है।