कई शिष्यों ने यीशु को नष्ट कर दिया क्योंकि उन्हें विश्वास नहीं था कि उन्होंने क्या पढ़ा था। यीशु ने बारहों से पूछा यदि वे भी छोड़ने जा रहे थे और पीटर ने जवाब दिया, "हम मानते हैं, और हम जानते हैं कि आप भगवान का पवित्र एक हैं।
60 इसलिए उसके चेलों में से बहुतों ने यह सुनकर कहा, “यह तो कठोर शिक्षा है; इसे कौन मान सकता है?”61 यीशु ने अपने मन में यह जानकर कि मेरे चेले आपस में इस बात पर कुढ़कुढ़ाते हैं, उनसे पूछा, “क्या इस बात से तुम्हें ठोकर लगती है?62 और यदि तुम मनुष्य के पुत्र को जहाँ वह पहले था, वहाँ ऊपर जाते देखोगे, तो क्या होगा? (भज. 47:5)63 आत्मा तो जीवनदायक है, शरीर से कुछ लाभ नहीं। जो बातें मैंने तुम से कहीं हैं वे आत्मा है, और जीवन भी हैं।64 परन्तु तुम में से कितने ऐसे हैं जो विश्वास नहीं करते।” क्योंकि यीशु तो पहले ही से जानता था कि जो विश्वास नहीं करते, वे कौन हैं; और कौन मुझे पकड़वाएगा।65 और उसने कहा, “इसलिए मैंने तुम से कहा था कि जब तक किसी को पिता की ओर से यह वरदान न दिया जाए तब तक वह मेरे पास नहीं आ सकता।”66 इस पर उसके चेलों में से बहुत सारे उल्टे फिर गए और उसके बाद उसके साथ न चले।67 तब यीशु ने उन बारहों से कहा, “क्या तुम भी चले जाना चाहते हो?”68 शमौन पतरस ने उसको उत्तर दिया, “हे प्रभु, हम किसके पास जाएँ? अनन्त जीवन की बातें तो तेरे ही पास हैं।69 और हमने विश्वास किया, और जान गए हैं, कि परमेश्वर का पवित्र जन तू ही है।”