जकर्याह ने एक लेखन टैबलेट के लिए कहा क्योंकि एक चर्चा थी कि क्या उनका नाम जकर्याह था उसके पिता या जॉन के बाद उनकी मां के रूप में चाहता था। जकर्याह ने टैबलेट पर जॉन को मुद्रित किया। लोग परेशान थे लेकिन उन्हें पता था कि भगवान उनके साथ थे।
57 तब एलीशिबा के जनने का समय पूरा हुआ, और वह पुत्र जनी।58 उसके पड़ोसियों और कुटुम्बियों ने यह सुनकर, कि प्रभु ने उस पर बड़ी दया की है, उसके साथ आनन्दित हुए।59 और ऐसा हुआ कि आठवें दिन वे बालक का खतना करने आए और उसका नाम उसके पिता के नाम पर जकर्याह रखने लगे। (उत्प. 17:12, लैव्य. 12:3)60 और उसकी माता ने उत्तर दिया, “नहीं; वरन् उसका नाम यूहन्ना रखा जाए।”61 और उन्होंने उससे कहा, “तेरे कुटुम्ब में किसी का यह नाम नहीं।”62 तब उन्होंने उसके पिता से संकेत करके पूछा कि तू उसका नाम क्या रखना चाहता है?63 और उसने लिखने की पट्टी मँगवाकर लिख दिया, “उसका नाम यूहन्ना है,” और सभी ने अचम्भा किया।64 तब उसका मुँह और जीभ तुरन्त खुल गई; और वह बोलने और परमेश्वर की स्तुति करने लगा।65 और उसके आस-पास के सब रहनेवालों पर भय छा गया; और उन सब बातों की चर्चा यहूदिया के सारे पहाड़ी देश में फैल गई।66 और सब सुननेवालों ने अपने-अपने मन में विचार करके कहा, “यह बालक कैसा होगा?” क्योंकि प्रभु का हाथ उसके साथ था।