यीशु गैलीले के सागर द्वारा एक नवजात भेड़ के बच्चे के साथ चलता है जो अपनी मां से भटक गया है। वह कोमल रूप से उसे वापस ले जाता है, अपने सभी झुंडों के लिए उनकी निरंतर देखभाल का प्रतीक है।
1 सब चुंगी लेनेवाले और पापी उसके पास आया करते थे ताकि उसकी सुनें।2 और फरीसी और शास्त्री कुढ़कुढ़ाकर कहने लगे, “यह तो पापियों से मिलता है और उनके साथ खाता भी है।”3 तब उसने उनसे यह दृष्टान्त कहा:4 “तुम में से कौन है जिसकी सौ भेड़ें हों, और उनमें से एक खो जाए तो निन्यानवे को मैदान में छोड़कर, उस खोई हुई को जब तक मिल न जाए खोजता न रहे? (यहे. 34:11,12,16)5 और जब मिल जाती है, तब वह बड़े आनन्द से उसे काँधे पर उठा लेता है।6 और घर में आकर मित्रों और पड़ोसियों को इकट्ठे करके कहता है, ‘मेरे साथ आनन्द करो, क्योंकि मेरी खोई हुई भेड़ मिल गई है।’7 मैं तुम से कहता हूँ; कि इसी रीति से एक मन फिरानेवाले पापी के विषय में भी स्वर्ग में इतना ही आनन्द होगा, जितना कि निन्यानवे ऐसे धर्मियों के विषय नहीं होता, जिन्हें मन फिराने की आवश्यकता नहीं।