Capernaum में व्यस्त दिन
| Secondary Keywords | कफरनहूम दिन नया यीशु वसीयतनामा व्यस्त |
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| धर्मग्रंथों | Matthew 12:15-21 Matthew 14:34-36 Matthew 8:14-17 मरकुस 1:29-34 मरकुस 3:7-12 मरकुस 6:55-56 लूका 4:38-41 Luke 438 वह आराधनालय में से उठकर शमौन के घर में गया और शमौन की सास को तेज बुखार था, और उन्होंने उसके लिये उससे विनती की। 39 उसने उसके निकट खड़े होकर ज्वर को डाँटा और ज्वर उतर गया और वह तुरन्त उठकर उनकी सेवा-टहल करने लगी। 40 सूरज डूबते समय जिन-जिनके यहाँ लोग नाना प्रकार की बीमारियों में पड़े हुए थे, वे सब उन्हें उसके पास ले आएँ, और उसने एक-एक पर हाथ रखकर उन्हें चंगा किया। 41 और दुष्टात्मा चिल्लाती और यह कहती हुई, “तू परमेश्वर का पुत्र है,” बहुतों में से निकल गई पर वह उन्हें डाँटता और बोलने नहीं देता था, क्योंकि वे जानती थी, कि यह मसीह है। Mark 129 और वह तुरन्त आराधनालय में से निकलकर, याकूब और यूहन्ना के साथ शमौन और अन्द्रियास के घर आया। 30 और शमौन की सास तेज बुखार से पीड़ित थी, और उन्होंने तुरन्त उसके विषय में उससे कहा। 31 तब उसने पास जाकर उसका हाथ पकड़ के उसे उठाया; और उसका बुखार उस पर से उतर गया, और वह उनकी सेवा-टहल करने लगी। 32 संध्या के समय जब सूर्य डूब गया तो लोग सब बीमारों को और उन्हें, जिनमें दुष्टात्माएँ थीं, उसके पास लाए। 33 और सारा नगर द्वार पर इकट्ठा हुआ। 34 और उसने बहुतों को जो नाना प्रकार की बीमारियों से दुःखी थे, चंगा किया; और बहुत से दुष्टात्माओं को निकाला; और दुष्टात्माओं को बोलने न दिया, क्योंकि वे उसे पहचानती थीं। Mark 37 और यीशु अपने चेलों के साथ झील की ओर चला गया: और गलील से एक बड़ी भीड़ उसके पीछे हो ली। 8 और यहूदिया, और यरूशलेम और इदूमिया से, और यरदन के पार, और सोर और सीदोन के आस-पास से एक बड़ी भीड़ यह सुनकर, कि वह कैसे अचम्भे के काम करता है, उसके पास आई। 9 और उसने अपने चेलों से कहा, “भीड़ के कारण एक छोटी नाव मेरे लिये तैयार रहे ताकि वे मुझे दबा न सकें।” 10 क्योंकि उसने बहुतों को चंगा किया था; इसलिए जितने लोग रोग से ग्रसित थे, उसे छूने के लिये उस पर गिरे पड़ते थे। 11 और अशुद्ध आत्माएँ भी, जब उसे देखती थीं, तो उसके आगे गिर पड़ती थीं, और चिल्लाकर कहती थीं कि तू परमेश्वर का पुत्र है। 12 और उसने उन्हें कड़ी चेतावनी दी कि, मुझे प्रगट न करना। Mark 655 आस-पास के सारे देश में दौड़े, और बीमारों को खाटों पर डालकर, जहाँ-जहाँ समाचार पाया कि वह है, वहाँ-वहाँ लिए फिरे। 56 और जहाँ कहीं वह गाँवों, नगरों, या बस्तियों में जाता था, तो लोग बीमारों को बाजारों में रखकर उससे विनती करते थे, कि वह उन्हें अपने वस्त्र के आँचल ही को छू लेने दे: और जितने उसे छूते थे, सब चंगे हो जाते थे। Matthew 1215 Jesus, aware of this, withdrew from there. And many followed him, and he healed them all 16 and ordered them not to make him known. 17 This was to fulfill what was spoken by the prophet Isaiah: 18 “Behold, my servant whom I have chosen, my beloved with whom my soul is well pleased. I will put my Spirit upon him, and he will proclaim justice to the Gentiles. 19 He will not quarrel or cry aloud, nor will anyone hear his voice in the streets; 20 a bruised reed he will not break, and a smoldering wick he will not quench, until he brings justice to victory; 21 and in his name the Gentiles will hope.” Matthew 1434 And when they had crossed over, they came to land at Gennesaret. 35 And when the men of that place recognized him, they sent around to all that region and brought to him all who were sick 36 and implored him that they might only touch the fringe of his garment. And as many as touched it were made well. Matthew 814 And when Jesus entered Peter's house, he saw his mother-in-law lying sick with a fever. 15 He touched her hand, and the fever left her, and she rose and began to serve him. 16 That evening they brought to him many who were oppressed by demons, and he cast out the spirits with a word and healed all who were sick. 17 This was to fulfill what was spoken by the prophet Isaiah: “He took our illnesses and bore our diseases.” |